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Poll: Virginia governor’s race in dead heat

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2 Comments

2 Comments

  1. vorbelutrioperbir

    December 28, 2022 at 2:25 pm

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स्वामी प्रसाद ने किसे कह दिया कुत्ते की तरह भौंकते हैं? लखनऊ में जलाई गईं रामचरितमानस की प्रतियां

Curated by धीरेंद्र सिंह | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated: 29 Jan 2023, 1:52 pmUP Politics Ramcharitmanas Burn Hindi News: रामचरितमानस की प्रतियां जलाने का उत्तर प्रदेश में पहली बार मामला सामने आया है। राजधानी लखनऊ में स्वामी प्रसाद मौर्य का समर्थन करते हुए अखिल भारतीय ओबीसी महासभा ने रामचरितमानस प्रतियां जला दी। इससे पहले मौर्य ने…

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स्वामी प्रसाद ने किसे कह दिया कुत्ते की तरह भौंकते हैं? लखनऊ में जलाई गईं रामचरितमानस की प्रतियां

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धीरेंद्र सिंह

| नवभारतटाइम्स.कॉम | As much as this level: 29 Jan 2023, 1: 52 pm

UP Politics Ramcharitmanas Burn Hindi News: रामचरितमानस की प्रतियां जलाने का उत्तर प्रदेश में पहली बार मामला सामने आया है। राजधानी लखनऊ में स्वामी प्रसाद मौर्य का समर्थन करते हुए अखिल भारतीय ओबीसी महासभा ने रामचरितमानस प्रतियां जला दी। इससे पहले मौर्य ने ट्वीट कर ऐलान किया कि वह अपनी बात नहीं बदलेंगे। साथ ही विवादित बयान भी दिया।

​swami prasad maurya ramcharitmanas
स्वामी प्रसाद मौर्य ने फिर दिया विवादित बयान, लखनऊ जलाई गई रामचरितमानस

हाइलाइट्स

  • स्वामी प्रसाद मौर्य ने अखिलेश से मिलकर फिर दिया विवादित बयान
  • रामचरितमानस विवादित बयान को लेकर दर्ज हो चुके हैं कई केस
  • यूपी के लखनऊ में रामचरितमानस की प्रतियां जलाकर मौर्य का समर्थन
लखनऊ: सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य रामचरितमानस विवाद के बाद भी लगातार विवादित बयान दे रहे है। अब स्वामी प्रसाद मौर्य ने उनका विरोध करने वालों को कुत्ता कह दिया है? स्वामी प्रसाद मौर्य के नए विवादित ट्वीट से कुछ ऐसा ही लग रहा है। इससे पहले स्वामी प्रसाद मौर्य ने शनिवार को लखनऊ में अखिलेश यादव से मुलाकात की थी। तब माना जा रहा था कि अखिलेश यादव उन्हें रामचरितमानस विवाद पर शांत रहने और सही भाषा का इस्तेमाल करने के लिए कहेंगे। हालांकि स्थिति उसकी उल्ट नजर आ रही है। दूसरी तरफ लखनऊ में स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान का समर्थन करते हुए कुछ लोगों ने रामचरितमानस की प्रतियां जलाई है।



स्वामी प्रसाद मौर्य ने रविवार को एक ट्वीट किया है। इसमें उन्होंने लिखा है कि धर्म की दुहाई देकर आदिवासियों दलितों-पिछड़ों और महिला को अपमानित किए जाने की साजिश का वह विरोध करते रहेंगे। आगे लिखा कि जिस तरह कुत्तों के भौंकने से हाथी अपनी चाल नहीं बदला, उसी तरह इन सभी को सम्मान दिलाने तक मैं भी अपनी बात नहीं बदलूंगा। रामचरित्रमानस पर विवादित टिप्पणी के बाद विपक्षी दल और साधु-संत समाज लगातार स्वामी प्रसाद मौर्य का विरोध कर रहा है। माना जा रहा है कि मौर्य ने इस अभद्र भाषा का इस्तेमाल उन्हीं की तरफ किया है।

पंडे और पुजारियों पर भी दिया था विवादित बयान

इससे पहले स्वामी प्रसाद मौर्य ने पंडे और पुजारियों को कहा था कि पागलों की तरह भौंक ररे हैं। कुछ दिन पहले जब रामचरितमानस विवाद के चलते स्वामी प्रसाद मौर्य पर प्रदेश में कई मुकदमे दर्ज हुए तो भी उन्हें बयान दिया था। इसमें उन्होंने कहा था कि पंडे और पुजारियों को अपने धंधे पर खतरा दिखाई दे रहा है, इसलिए एक तरह के लोग विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि इनको आभास हो गया है कि मौर्या के आवाहन पर दलित पिछड़े एक हो गए तो इनका धंधा बंद हो जाएगा, इसलिए वही लोग पागलों की तरह भौंक रहे हैं।

रामचरितमानस जलाकर किया विरोध प्रदर्शन

स्वामी प्रसाद मौर्य के समर्थन में अखिल भारतीय ओबीसी महासभा सड़क पर उतर आया है। लखनऊ के पीजीआई कोतवाली क्षेत्र के वृंदावन योजना में रामचरितमानस की प्रतियां जलाई गई है। अखिल भारतीय ओबीसी महासभा ने रामचरितमानस की प्रतियां जलाकर स्वामी प्रसाद मौर्या के समर्थन का ऐलान किया है।

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समाज तोड़ने वाले बयानों पर नीतीश चुप क्यों? 2024 के लिए मंडल को जिंदा करने की तैयारी?

Reported by रमाकांत चंदन | Edited by ऋषिकेश नारायण सिंह | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated: 24 Jan 2023, 2:04 pmBihar Politics : बिहार की राजनीति एक बार फिर से 90 के दशक की ओर घूमती दिख रही है, जब भूरा बाल साफ करो जैसे जुमले हवा में उछाले जाते थे। नीतीश ने इन सबका विरोध किया…

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समाज तोड़ने वाले बयानों पर नीतीश चुप क्यों? 2024 के लिए मंडल को जिंदा करने की तैयारी?

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रमाकांत चंदन

| Edited by ऋषिकेश नारायण सिंह | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated: 24 Jan 2023, 2: 04 pm

Bihar Politics : बिहार की राजनीति एक बार फिर से 90 के दशक की ओर घूमती दिख रही है, जब भूरा बाल साफ करो जैसे जुमले हवा में उछाले जाते थे। नीतीश ने इन सबका विरोध किया लेकिन आज महागठबंधन सरकार के साथ कुछ ऐसे ही बयानों पर उनकी मौन सहमति दिख रही है।

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Explore: Why vandalising Vande Bharat is no longer about politics

SynopsisSince the launch of Vande Bharat in February 2019 on the New Delhi-Varanasi line, on an average, there has been three cases of stone-pelting on various Indian Railways trains across the country. The sites of the crime – by the Railway Act, 1989, Section 152, attacking or vandalising a train is a punishable crime -…

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Explore: Why vandalising Vande Bharat is no longer about politics

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Since the initiate of Vande Bharat in February 2019 on the New Delhi-Varanasi line, on a median, there became once three cases of stone-pelting on a model of Indian Railways trains all the draw by the nation. The web sites of the crime – by the Railway Act, 1989, Fragment 152, attacking or vandalising a practice is a punishable crime – vary from approach Jaipur, Visakhapatnam, Bhubaneshwar and a model of stretches in Kerala. In the end of the December 2018 trial urge on the Delhi-Agra line, anyone had smashed a window of the practice too.

Bewitch that iconic scene in Satyajit Ray’s Pather Panchali. Durga and Apu are sitting at some point soon of a brush of swaying kansh grass – the model you stumble on from the practice whereas crossing the river from Yamuna Bank web whisper online to Indraprastha on the Delhi Metro. Carrying a paper crown and chewing on a sugarcane stalk, Apu aspects in direction of the horizon and asks his sister, ‘What are those?’

In the outdated physique, we now dangle got viewed those symbols of Nehruvian construction and development – a row of electrical towers holding palms by their cables. These towers will no longer be too a long way a long way from Apu and Durga’s dwelling in Nischindipur village. However they seem a sure nation, a sure age away.

Durga has no reply to Apu’s search recordsdata from. She has no conception what ‘those’ are. She shrugs and returns to the colour and sway of the kansh grass. Apu tries to initiate his mouth again – ‘If Ma…’ He presumably wished to teach her, ‘If Ma knew we now dangle ventured to this point, she would possibly well presumably perchance be very offended.’ However forward of he can carry out his sentence, Durga places her finger on his lips – or no longer it is a long way the universal designate for ‘Shut up’.

She has already heard one more sound over and above the saunter. Impatiently, Durga begins to appear at all the draw by the horizon. She’s heard one thing, and or no longer it is imminent in their route. On the left of the physique, we stumble on a tail of murky smoke forming. Sister and brother urge out of the kansh grass and develop a flee by in direction of the availability of the sound. Belching murky smoke and crossing the panorama, a immense caterpillar, conserving a exact beat, makes its draw all the draw by impulsively.

The digicam with out notice swings. We stumble on Apu urge off in direction of the practice. We stumble on next the field and kansh grass swaying from the reverse discontinuance of the tracks between the wheels of the passing practice. And then, Apu picks up a stone and throws it on the thrilling, dread-sharp beast that is the rushing practice.

You is probably going to be correct. The final bit is made up. However the compose of discussion (sic) I heard over the outdated couple of weeks on the stones hurled on the Vande Bharat Specific, makes me are making an are attempting to hurl a stone or two at ‘skilled panels’ in TV studios. In intention of focusing on the acts of vandalism performed on the unique semi-high-urge practice, these boffins are obsessed about making it a political fracas — a Modi authorities vs opposition-dominated states thingie. All attributable to a pair of days after a Vande Bharat practice on the Howrah-New Jalpaiguri line in West Bengal inaugurated by the PM only in the near previous, a window of the passing practice became once broken by a stone pelter. It ought to had been an act of political gunda-gardi.

This week, three persons had been arrested for throwing stones on the coaches of Vande Bharat – in Visakhapatnam, YS Jagan Mohan Reddy-dominated Andhra Pradesh. The police stumbled on the miscreants to no longer dangle smashed the practice’s dwelling windows attributable to they had been anti-Modi or anti-BJP, however – drum roll – attributable to they had been inebriated.

Since the initiate of Vande Bharat in February 2019 on the New Delhi-Varanasi line, on a median, there became once three cases of stone-pelting on a model of Indian Railways trains all the draw by the nation. The web sites of the crime – by the Railway Act, 1989, Fragment 152, attacking or vandalising a practice is a punishable crime – vary from approach Jaipur, Visakhapatnam, Bhubaneshwar and a model of stretches in Kerala. In the end of the December 2018 trial urge on the Delhi-Agra line, anyone had smashed a window of the practice too.

Basically essentially based on the Railway Safety Force (RPF), nearly all attacks on passing trains are by kids who’re living in shanties next to the practice traces. For them, or no longer it is a thrill. By the time a practice registers it has been broken and slows down, these kids dangle lengthy fled from the scene. The ones repeatedly arrested are drunks throwing empty bottles at passing trains.

Really, public property is by no draw viewed as belonging to the general public. It be the authorities’s. So with no thought of ownership, trains are initiate game for cheap thrills. The shinier, the higher. It has zilch to retain out with politics.

( First of all published on Jan 14, 2023 )

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